कार्टाजेना जैव सुरक्षा प्रोटोकॉल क्या है ? | Cartagena protocol kya hai ?

कार्टाजेना जैव सुरक्षा प्रोटोकॉल क्या है ? | Cartagena protocol kya hai ? 


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      कार्टाजेना जैव सुरक्षा प्रोटोकॉल     


29 जनवरी, 2000 को जैव विविधता पर सम्मेलन (CBD) के पक्षकार (Parties) देशों ने कोलंबिया के कार्टाजेना नामक स्थान पर एक पूरक समझौता किया जो जैव सुरक्षा पर कार्टाजेना समझौता कहलाया। 11 सितंबर, 2003 को यह समझौता प्रभावी हुआ।

• इस प्रोटोकॉल का मुख्य उद्देश्य आधुनिक जैव-तकनीकी (Biotechnology) के प्रयोग से उत्पन्न होने वाले संभावित खतरों से जैव विविधता की रक्षा करना है। इसके अलावा मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण को भी इस हानि से बचाना है।

• यह प्रोटोकॉल विभिन्न देशों के बीच जीवित संवर्द्धित जीव (LMO) के आयात-निर्यात की प्रक्रिया और सुरक्षा संबंधी मानक तय करता है।

नोट: जीवित संवर्द्धित जीव (LMO) सामान्य अर्थ में आनुवंशिक संवर्द्धित जीव (GMO) ही हैं।

• जीवित संवर्द्धित जीव (LMO) के निर्यातकर्ता देश को उससे संबंधित संपूर्ण जानकारी आयातकर्ता देश को देनी पड़ती है। इसके बाद आयातकर्ता देश के ऊपर निर्भर है कि वह उन्हें खरीदे या नहीं। इसके अलावा भी निर्यातकर्ता देश को जैव-तकनीकी के प्रयोग से बनाए गए उत्पादों से संबंधित कई जिम्मेदारियाँ लेनी पड़ती हैं।

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