संन्यासी विद्रोह और एका आन्दोलन क्या थे| sanyashi vidroh | eka andolan |

संन्यासी विद्रोह


बंगाल में फकीर या संन्यासी विद्रोह के नाम से जाना जाने वाला यह विद्रोह अत्यधिक शोषण, अकालों की निरन्तरता (1770 का भीषण अकाल, अंग्रेजों की लूट-खसोट व आर्थिक मंदी तथा राजनैतिक अशांति आदि के कारण हुआ।

इसका मूल कारण आर्थिक था जिसमें हिन्दू तथा मुसलमानों दोनों की सहभागिता थी । 1770 के अकाल के बाद तो इतना तीव्रगामी विद्रोह हुआ कि 1773 में इसने समानान्तर सरकार तक बना ली।

इसका प्रभाव क्षेत्र ढाका, रंगपुर व मैमनपुर था।इसके नेतृत्वकर्त्ता मजनूशाह व देवी चौधरानी थे। बंकिम चंद चटर्जी ने इसकी पृष्ठभूमि पर ही आनन्दमठ ( संस्कृत भाषा में) की रचना की ।


 


एका आन्दोलन- 1921

मदारी पासी द्वारा हरदोई सीतापुर व बाराबंकी क्षेत्र में यह आन्दोलन शुरू किया गया। इसकी विशेषता यह थी कि इसमें किसानों के साथ छोटे जमींदारों की भूमिका थी।  



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