मौलिक अधिकार पर संक्षिप्त टिप्पणी | moulik adhikaron par sanchhipt tippani |
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हम इस पोस्ट मेें आपके लिए लेकर आए हैं मौलिक अधिकार पर संक्षिप्त टिप्पणी | moulik adhikaron par sanchhipt tippani |
Q.मौलिक अधिकार पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिये ?
उत्तर- मौलिक अधिकार वे अधिकार : जो किसी व्यक्ति के जीवन हेतु अनिवार्य एवं मौलिक होने के कारण उस देश के संविधान द्वारा नागरिकों को प्रदान किये जाते हैं तथा इन अधिकारों पर राज्य को हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं होता है, मौलिक अधिकार कहलाते हैं।
भारतीय संविधान द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकार असीमित नहीं है, वरन् संविधान के द्वारा उन पर प्रतिबंध भी लगाया गया है।
भारतीय संविधान के भाग-3 में अनुच्छेद 12 से 35 तक मौलिक अधिकारों का उल्लेख किया गया है। मूल संविधान में भारतीय नागरिकों को 7 मौलिक अधिकार प्रदान किये गये थे, परन्तु 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा अनुच्छेद 19 (1) (च) एवं अनुच्छेद-31 के संपत्ति के मौलिक अधिकार को समाप्त कर दिया गया। वर्तमान में संविधान द्वारा भारतीय
नागरिकों को 6 मौलिक अधिकार प्राप्त हैं,
जो निम्न प्रकार हैं-
(अ) समानता का अधिकार (अनुच्छेद 14-18),
(ब) स्वतंत्रता का अधिकार (अनुच्छेद 19-22),
(स) शोषण के विरुद्ध अधिकार (अनुच्छेद 23-24),
(द) धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार (अनुच्छेद 25-28),
(इ) संस्कृति एवं शिक्षा का अधिकार (अनुच्छेद29 - 30),
(फ) संवैधानिक उपचारों का अधिकार (अनुच्छेद 32-35 )
इस प्रकार मौलिक अधिकार व्यक्तियों के हितों में वृद्धि कर नागरिकों के व्यक्तित्व का विकास करते हैं।
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