मीराबाई | meerabai |
मीराबाई | meerabai |
हेलो, दोस्तों स्वागत है आपका हमारी वेबसाइट पर यहां आपको सभी तरह की प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए पीडीएफ नोट्स, स्टेटिक जीके और करेंट अफेयर्स जो विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए उपयोगी है ।
हम अपने इस ब्लॉग के माध्यम से आपको विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण विषयों एवं ऐसे टॉपिक्स जिनके नोट्स आसानी से उपलब्ध नहीं होते उन्हें उपलब्ध कराते हैं ।
हम इस post मेें आपके लिए लेकर आए हैं मीराबाई | meerabai |
मीराबाई (1498-1546 ई.)
जन्म/स्थल: 1498 ई. को मेड़ता जिले के कुदवी ग्राम में।
मृत्युः 1546 ई. को गुजरात के द्वारका में।
पिता- रतनसिंह राठौर ।
गुरूः रैदास ।
पतिः भोजराज (राणा मानसिंह के पुत्र) 2 विवाहः 1516 ई. में राणा सांगा के बड़े पुत्र युवराज भोजराज से हुआ था। | किंतु कुछ समय बाद वह विधवा हो गयी। | इसी विपत्ति में खानवा के युद्ध (1527ई.) में राणा सांगा की ओर से लड़ते हुए उनके पिता रतन सिंह युद्ध में मारे गए। कुछ समय पश्चात राणासांगा की भी मृत्यु हो गयी।
• कृष्ण की भक्ति में लीन होकर भक्तों और संतों के बीच नृत्य गान को उन्होंने अपना दिनचर्या बना लिया। जब मेड़ता पर जोधपुर के मालदेव ने आक्रमण कर अधिकार कर लिया तब उन्होंने द्वारका (गुजरात) को प्रस्थान किया जहां पर भक्त का जीवन व्यतीत करते हुए 1546 ई. में उनकी मृत्यु हो गयी।
दार्शनिक मतः
मीराबाई कृष्ण भक्ति की एक साकार प्रतिमा थी। वह अपने इष्टदेव श्रीकृष्ण की भक्ति प्रियतम (पति) के रूप में करती थी।
तुलना:
मीरा की तुलना प्रसिद्ध सूफी महिला रबिया से किया जाता है जिन्होंने ईश्वर को पति के रूप में माना है।
रचनाएं:
मीराबाई ने अनेक भक्ति गीतों की रचना की है जो मुख्यतः ब्रज भाषा में तथा आंशिक रूप से राजस्थानी भाषा में लिखे गए हैं। इनकी कुछ रचनाएं गुजराती भाषा में भी है। मीराबाई के भक्ति गीत (भजनों) को पदावली कहा जाता है। इन गीतों में उन्हें गीत शैली की कविता की देवी का सम्मान दिया। मीराबाई ने गीतगोविंद पर टीका लिखी थी।
महत्वपूर्ण विविध Gk Topics for MPPSC Pre 2021
धन्यवाद ! अगर आपको पोस्ट अच्छी लगी हो तो इसे ज्यादा से ज्यादा दोस्तों के साथ शेयर करें ताकि उन्हें भी इस पोस्ट से सहायता मिल सके ।
आप हमारे साथ विभिन्न सोशल साइट्स पर नीचे दिए लिंक के माध्यम से जुड़ सकते हैं ।
हमारे साथ जुड़ें -
Comments
Post a Comment