मटकी नृत्य | matki nratya |

मटकी नृत्य | matki nratya |


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मटकी नृत्य-


स्थान- मालवा।

वाद्ययंत्र - ढोल या ढोलक 

मालवा में मटकी नाच का अपना अलग परम्परागत स्वरूप है।मालवा स्थान में गाँव की महिलाएँ विभिन्न अवसरों पर मटकी नाच करती हैं।

ढोल या ढोलक को एक खास लय जो मटकी के नाम से जानी जाती है, उसकी थाप पर महिलाएँ नृत्य करती हैं। प्रारंभ में एक ही महिला नाचती है, इसे झेला कहते हैं।

इस नृत्य में महिलाएँ अपनी परम्परागत मालवी वेशभूषा में चेहरे पर घूँघट डाले नृत्य करती हैं। नाचने वाली महिलाएँ पहले गीत की कड़ी उठाती है, फिर आस-पास की महिलाएँ समूह में इस कड़ी को दोहराती हैं।


नृत्य के केन्द्र में ढोल होता है। ढोल पर मटकी नृत्य की मुख्य ताल है।होल किमची और डण्डे से बजाया जाता है। मटकी नाव को कहीं कहीं आड़ा खड़ा और रजवाड़ी नाच भी कहते हैं।



 
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