निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा अधिकार अधिनियम 2009 | Right to Education Act 2009 | RTE

निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा अधिकार अधिनियम 2009 | Right to Education Act 2009 | RTE


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निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा अधिकार अधिनियम 2009 :

• विधेयक 27 अगस्त, 2009 को भारतीय राजपत्र में प्रकाशित।

• 1 अप्रैल, 2010 से लागू, वर्ष 2002 में संविधान में किये गए 86वें संशोधन के जरिए अनुच्छेद 21 (ए) को शामिल किया गया जिसमें 6-14 वर्ष आयु वर्ग के सभी बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा प्रदान किये जाने को मौलिक अधिकार बनाया गया है। 

• अनुच्छेद 21-ए के अनुरूप उपयुक्त विधान को कानूनी रूप देने के लिए 4 अगस्त, 2009. को संसद ने बच्चों के लिए निःशुल्क तथा अनिवार्य शिक्षा (आर.टी.ई.) अधिनियम, 2009 को मंजूरी दी थी।

• अधिनियम के मुख्य प्रावधान :

• विधेयक के अनुसार शिक्षा पर व्यय का भार केन्द्र एवं राज्य सरकारें संयुक्त रूप से वहन करें ।

• शिक्षा का अधिकार के अन्तर्गत सभी को मुफ्त शिक्षा उपलब्ध कराने पर सरकारी व्यय पर प्रतिवर्ष 12000 करोड़ रुपये का भार बढ़ेगा।

• निजी और अनुदान प्राप्त स्कूलों की 25 प्रतिशत सीट भी गरीब बच्चों के लिए आरक्षित होगी इसकी लागत सरकार वहन करेगी। केंद्र राज्य वित्तीयन 65 35 रखा गया है। 

• सरकारी स्कूलों में गुणवत्तायुक्त शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए कई प्रावधान किये गये हैं शिक्षकों को निजी ट्यूशन चलाने की छूट नहीं होगी, साथ ही शिक्षकों को गैर शिक्षण गतिविधियों में भी शामिल होने से रोका जायेगा.।

• नई व्यवस्था में बच्चों के गार्जियन को अधिक भागीदारी सुनिश्चित कराने हेतु प्रत्येक स्कूलों में 'विद्यालय प्रबंधन कमेटी' के गठन का प्रावधान किया गया है । यह कमेटी विद्यालय की निगरानी से लेकर इसके कामकाज को भी देखेगी ।

• कानून के कार्यान्वयन पर अभिभावक रखने के लिये 'राष्ट्रीय बुनियादी शिक्षा आयोग' का गठन किया जायेगा । इसके अध्यक्ष की नियुक्ति एक कमेटी द्वारा की जायेगी, जिसके सदस्य प्रधानमंत्री, संसद के दोनों सदनों में विपक्ष के नेता, मानव संसाधन मंत्री एवं लोकसभा अध्यक्ष होंगे । 

• विद्यालय में पढ़ रहे बच्चों को शारीरिक दण्ड, नामांकन के लिए, बच्चों की स्क्रीनिंग प्रणाली, कैपिटेशन फी, निष्कासन एवं कारावास पर रोक लगाता है ।

• विधेयक में शिक्षक छात्र अनुपात 1:40 रखने का प्रावधान किया गया है । 

• संविदा शिक्षकों की नियुक्ति अब नहीं होगी । अब केवलपूर्ण वेतनमान पर योग्य एवं स्थायी शिक्षकों की ही नियुक्ति होगी ।

 
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