अनुच्छेद 370 के पक्ष में दिये जाने वाले तर्क
अनुच्छेद 370 के पक्ष में दिये जाने वाले तर्क
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अनुच्छेद 370 के पक्ष में दिये जाने वाले तर्क -
• 1952 के दिल्ली समझौते में अनुच्छेद 370 के अंतर्गत केंद्र और राज्य के बीच रिश्ते के दायरे और अर्थ को परिभाषित किया गया। राष्ट्रपति के आदेशों की अनुवर्ती श्रृंखला ने संविधान के कई प्रावधानों को जम्मू एवं कश्मीर तक विस्तृत किया है, जैसे मूल अधिकार (संपत्ति के अधिकार के अलावा जो कि अब भी जम्मू एवं कश्मीर में मूल अधिकार है), आपातकाल के प्रावधान, संघ की आधिकारिक भाषाओं के संबंध में प्रावधान, केंद्र-राज्य संपर्क, सर्वोच्च न्यायालय की भाषा इत्यादि जिनसे अन्य राज्यों और जम्मू एवं कश्मीर में अधिक एकरूपता लाई जा सके।
• इस राज्य के संवैधानिक दर्जे पर पुनर्विचार करने की बजाय यह अधिक विवेकपूर्ण होगा कि इसके पहले राज्य के क्षेत्र की सम्पूर्णता के विषय में पाकिस्तान के साथ विवाद का समाधान होने का इंतज़ार करे।
• अभी जो नाजुक माहौल है, उसमें अचानक से अनुच्छेद 370 के प्रावधानों में बदलाव करना उन मुख्यधारा के राजनीतिज्ञों और उन युवाओं के बीच मनमुटाव को और बढ़ाएगा जो क्षेत्र में लगातार बनी हुई अस्थिरता से तंग आ चुके हैं। इससे कट्टरपंथियों और अलगाववादियों को उनके व्यवस्था विरोधी एजेंडा को नकारात्मक तरीके से विस्तार देने का बहाना मिल जाएगा। इसकी बजाय क्षेत्र के विभिन्न साझेदारों से परामर्श के साथ उत्तरोत्तर परिवर्तन की दिशा में आगे बढ़ना अधिक भरोसेमंद उपाय साबित होगा।
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