कबीरदास | kabeerdas | the kaveera |

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कबीरदास  (1440-1510 ई.) - 


जन्म / स्थल: 1440 ई. को उत्तर प्रदेश के वाराणसी में !

मृत्युः 1518 ई. में संतकबीर नगर जनपद के मगहर में। 

कबीर का अर्थः महान

गुरू: रामानंद

शिष्यः दादू एवं मलूक दास ।

 • जन्म विवादः कबीर की जाति तथा जन्म के बारे में लोगों के विचार भिन्न हैं। ऐसा माना जाता है। कबीर का जन्म 1440 ई. में एक विधवा स्त्री के गर्भ से हुआ था जिसने लोक लज्जा के कारण उन्हे लहरतारा नामक तालाब के किनारे फेंक दिया था।अली और नीरू नामक निःसंतान जुलाहे ने एक पुत्र के रूप में कबीर का पालन, पोषण किया था।

• समर्थकः कबीर हिंदू-मुस्लिम समन्वय के पैगम्बर थे। कबीर हिंदू और मुस्लिम दोनों के पुत्र थे

• विचारधारा: कबीर की विचारधारा विशुद्ध अद्वैतवादी थी।

• प्रमुख रचनाएं: साखी, सबद तथा रमैनी थे।

 • दार्शनिक मतः कबीर निर्गुण ब्रह्म के उपासक थे तथा एकेश्वरवाद (एक ईश्वर) में विश्वास करते थे। उनकी मान्यता थी कि परमेश्वर एक ही है उसे केवल राम रहीम, अल्लाह, हरि, खुदा और गोविंद अलग-अलग नामों से पुकारा जाता है। कबीर आत्मा और परमात्मा को एक मानते हुए भक्त और भगवान में कोई अंतर नहीं किए। इसलिए कबीर ईश्वर तक पहुंचने के लिए मंदिर, मस्जिद के स्थान पर ईश्वर के प्रति भक्त का प्रेम को सर्वश्रेष्ठ माना ।

• उल्लेखः 17वीं शताब्दी में मिराल उल असर में कबीर को फिरदौसिया सूफी कहा गया है। अबुल फजल ने कबीर को मुयाहिद (एकेश्वरवादी) कहा है।

• कबीरदास के सिद्धांतों को उनके शिष्य धर्मदास द्वारा बीजक में संकलित किया गया है। कबीर पंथी उनकी मृत्यु के बाद उनके शिष्यो ने कबीरपंथी नामक संप्रदाय प्रारंभ किया। कबीर के शिष्यों में दादू, मलूक दास, पुत्र कमाल, पुत्री कमाली, पदमनाथ ज्ञानीदास, भागोदास, जागूदास, गोपाल तथा धर्मदास थे। इनमें कमाल ने अहमदाबाद तथा पदमनाथ ने काशी में कबीर के मत का प्रचार किये।



 
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