पृथ्वीराज- संयोगिता प्रेम कथा | prathviraj sanyogita prem katha |

पृथ्वीराज- संयोगिता प्रेम कथा | prathviraj sanyogita prem katha |


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पृथ्वीराज- संयोगिता प्रेम कथा - 


• पृथ्वीराज चौहान और संयोगिता की प्रेमकथा अजमेर में लेकिन उनकी प्रेमकथा का दिल्ली की भूमि से भी विशेष सम्बध रहा। | दक्षिणी दिल्ली में किला राय पिथौड़ पृथ्वीराज चौहान के समय का है। राजा दिल्ली में भी रहा करते थे।


• पृथ्वीराज को कन्नौज के महाराजा जयचंद्र की पुत्री संयोगिता से प्रेम कर बैठे। कन्नौज में राजकुमारी संयोगिता का स्वयंवर आयोजित | किया गया, जिसमें पृथ्वीराज चौहान को नहीं बुलाया गया, , लेकिन उचित समय पर पहुंचकर संयोगिता की सहमति से महाराज पृथ्वीराज ने उनका अपहरण कर लिया। राजा जयचंद्र की मदद से मुहम्मद गौरी ने पृथ्वीराज चौहान को पराजित कर बंदी बना लिया।


• कहा जाता है कि उनकी आंखे गरम सलाखों से जला दी गई। पृथ्वीराज शब्द भेदी बाण छोड़ने में निपुण थे। इसलिए इस कला का प्रदर्शन आयोजित किया गया। जहां मुहम्मद गौरी को नेत्रहीन पृथ्वीराज ने शब्दभेदी बाण से मार गिराया और | इसके बाद अपनी दुर्गति से बचने के लिए पृथ्वीराज भी स्वयं को चाकू मार लिये। पत्नी संयोगिता को जब इसकी जानकरी मिली तो वह भी अपने पति के लिए सती हो गई।



 
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