राई लोक नृत्य | raai lok martya |

राई लोक नृत्य | raai lok martya |


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हम इस post मेें आपके लिए लेकर आए हैं राई लोक नृत्य | raai lok martya |



राई लोक नृत्य


स्थान- बघेलखण्ड, बुंदेलखण्ड ।

वाद्ययंत्र - ढोलक और नगड़ियाँ 

बुन्देलखण्ड अंचल की अपनी जातीय परम्परा मूलतः शौर्य और श्रृंगारपरक है। बुन्देलखण्ड के प्रख्यात लोकनृत्य राई में तीव्र शारीरिक चपलता, वेग, अंग, मुद्राएँ और समूहन के लयात्मक विन्यास के साथ लोक कविता के रूप में उद्याम श्रृंगार परक अर्थों की नियोजना एक स्वरूप में हैं।


बुन्देलखण्ड की तरह बघेलखण्ड में भी राई नृत्य का प्रचलन हैं किन्तु दोनों अंचलों के राई में अंतर होता है।

बुन्देलखण्ड में बेड़नी और मृदंग राई की जान होती है। बघेलखण्ड में राई ढोलक और नगड़ियाँ पर गाई बजाई जाती है। पुरुष ही स्त्री वेश धारण कर नाचते हैं।

राई विशेषकर अहीर जाति की नृत्य विशेषता हैं। स्त्रियाँ हाथों, पैरों और कमर की विशेष मुद्राओं में नाचती हैं।

राई गीत शृंगारपरक होते हैं, परन्तु बुन्देलखण्ड की तरह यौवन और श्रृंगार का उद्गम आवेग और तीव्रगति बघेलखण्ड में नहीं होती है। राई नृत्य में स्त्रियों की वेशभूषा और गहने परम्परागत होते हैं। पुरुष धोती, बाना, साफा और पैरों में घुंघरू पहनते है। 

प्रमुख कलाकार- श्री प्रकाश यादव तथा श्री रामसहाय पाण्डे ।



 
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