पावना विद्रोह को समझाइये | पावना विद्रोह क्या था | पावना विद्रोह|
पावना विद्रोह
बंगाल के पावना क्षेत्र में यह विद्रोह जमींदारों के शोषणकारी रवैये के विरुद्ध हुआ।
1873 में जमींदारों के खिलाफ एक संगठन बनाया गया (पहली बार किसानों को सांगठनिक आधार देने का प्रयास) पावना विद्रोहियों का कथन था "हम महारानी की रैय्यत बन कर रहना चाहते हैं।" यहाँ मुख्य समस्या यह थी कि अधिकांश जमींदार हिन्दू थे
तथा काश्तकार मुसलमान इसलिए कुछ लोग इसे सांप्रदायिक रंग भी देते हैं किन्तु यह गैर सांप्रदायिक विद्रोह था। 'अमृत बाजार पत्रिका' व 'हिन्दू पैट्रियाट' ने इसका विरोध किया तो बंकिमचंद व आर. सी. दत्त ने इसका समर्थन किया।प्रमुख नेतृत्वकर्त्ता ईशानचन्द्र राय, शंभूपाल व खुदी मल्लाह थे।
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