तेलंगाना विद्रोह क्या था | तेलंगाना विद्रोह कब हुआ था | telngana vidroh kya tha ?|
इस समय तेलंगाना हैदराबाद रियासत का अंग था
यहाँ तेलुगू भाषी किसानों का विद्रोह जमींदारों के समर्थक पुलिस और उनके गुण्डों के प्रति था ।
यहाँ विशेषकर नालगोण्डा के किसानों ने हिंसात्मक विद्रोह कर दिया।
इसका तात्कालिक कारण कुमारैया की पुलिस द्वारा हत्या थी। इसकी शहादत के बाद अति उग्र तरीके से कम्युनिस्ट पार्टी तथा आंध्र सभा ने संघर्ष छेड़ दिया और गुरिल्ला पद्धति से जारी रखा जो 1951 तक किसी न किसी रूप में चलता रहा।
बलवंतराय फड़के
1876-77 में पश्चिमी भारत में भीषण अकाल पड़ा और सरकार की तरफ से विशेष मदद नहीं पहुँचाई गई। फड़के ने यह आकलन किया कि विदेशी शासन ही उनकी दुर्दशा का मूल कारण है।
फड़के ने ग्रामवासियों व किसानों को संगठित कर राजनैतिक डकैती की योजना बनाई और कई बार इसे सफल अंजाम दिया।
भारतीय इतिहास की प्रथम राजनैतिक डकैती करने और भारत के प्रथम क्रांतिकारी होने का श्रेय इन्हें दिया जाता है।
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