मध्य प्रदेश की ऋतुएँ | madhya pradesh ki rituyen | seasons of madhya pradesh |

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आज हम आपके लिए बहुत ही महत्वपूर्ण टॉपिक लेकर आए हैं जो मध्यप्रदेश के विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं MPPSC , MPSI , VYAPAM , POLICE CONSTABLE , PATWARI , Teachers exams आदि के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है।

 इस पोस्ट मे आप जानेंगे मध्य प्रदेश की ऋतुएँ | madhyapradesh ki rituyen | seasons of madhyapradesh |इस टॉपिक से प्रतियोगी परीक्षाओं में अक्सर प्रश्न पूछे जाते हैं। आप सभी नीचे दी गई जानकारी को कम से कम दो बार अवश्य पढ़ें जिससे आपको इन्हें याद करने में आसानी होगी।


मध्य प्रदेश की ऋतुएँ 

मध्य प्रदेश की ऋतुओं को जलवायु के आधार पर तीन वर्गों में विभाजित किया गया है।

1. ग्रीष्म ऋतु

• राज्य में ग्रीष्म ऋतु मार्च से प्रारम्भ होकर मध्य जून तक रहती है। 

• राज्य में मार्च के पश्चात् तापमान निरन्तर बढ़ता जाता है तथा सम्पूर्ण राज्य में तापमान मई के मध्य तक आते-आते 30° से.ग्रे से ऊपर हो जाता है।

•मई में राज्य के उत्तरी-पश्चिमी क्षेत्र में तापमान अधिक होता है। इस दौरान राज्य के ग्वालियर, मुरैना, दतिया तथा दक्षिणी बालाघाट जिलों में 47° सेग्रे तक तापमान मिलता है।

•राज्य में ग्रीष्म ऋतु को युनाला कहा जाता है। 

•ग्रीष्म ऋतु में समताप रेखा 40°C राज्य को दो भागों में विभाजित करती है।

•इस रेखा के पूर्वी हिस्से में मण्डला, शहडोल, सिवनी, छिन्दवाड़ा एवं बैतूल जिले आते हैं तथा पश्चिम हिस्से में देवास, शाजापुर, इन्दौर, धार, उज्जैन, झाबुआ, रतलाम एवं मन्दसौर जिले आते हैं।

•गंजबासौदा (विदिशा जिला) राज्य में सर्वाधिक गर्म क्षेत्र माना जाता है। जिसका तापमान 48.7° तक मापा गया है।

2. वर्षा ऋतु

• राज्य में वर्षा ऋतु का आगमन मध्य जून से प्रारम्भ हो जाता है। जून माह में उत्तर-पश्चिमी भारत में न्यून वायुदाब केन्द्र बनने से महासागरों के ऊपर से बहने वाली हवाएँ इस ओर चलने लगती हैं।
यहाँ दक्षिण-पश्चिम मानसून के कारण अधिक वर्षा होती है। वर्षा, धूप की कमी तथा अधिक आर्द्रता होने के कारण तापमान गिरने लगता है, परन्तु जुलाई के पश्चात् औसत मासिक तापमान एक समान रहता है। 

•पठारी तथा पहाड़ी क्षेत्रों में अधिक वर्षा होती है, क्योंकि ऐसे स्थलों की ऊँचाई अपेक्षाकृत अधिक होती है।

•अक्टूबर तक आते-आते वर्षा की मात्रा न्यूनतम हो जाती है, जिसके कारण तापमान पुनः बढ़ जाता है, इसलिए सितम्बर-अक्टूबर की गर्मी को द्वितीय ग्रीष्म ऋतु कहा जाता है।

•सम्पूर्ण राज्य की औसत वर्षा लगभग 112 सेमी है। राज्य में वर्षा ऋतु को चौमासा कहते हैं।

वर्षा के आधार पर राज्य को निम्नलिखित चार भागों में बाँटा गया है

(i) अधिक वर्षा वाले क्षेत्र

•राज्य के पूर्वी हिस्से में औसत वर्षा 150 सेमी से अधिक होती है। इस क्षेत्र में स्थित पंचमढ़ी, महादेव पर्वत, मण्डला, सीधी तथा बालाघाट में अधिक वर्षा होती है।

•सर्वाधिक वर्षा वाला क्षेत्र पंचमढ़ी (199 सेमी) सतपुड़ा श्रेणी के अन्तर्गत आता है।

(ii) औसत से अधिक वर्षा वाले क्षेत्र 

•इस क्षेत्र में बैतूल, छिन्दवाड़ा, सिवनी,होशंगाबाद, नरसिंहपुर इत्यादि जिले आते हैं। 
•पूर्वी भाग में स्थित होने के कारण इन जिलों में अधिक आर्द्रता होने से अधिक वर्षा होती है। इन क्षेत्रों में लगभग 125 सेमी से 150 सेमी तक वर्षा होती है।

(iii) औसत वर्षा वाले क्षेत्र

•इस क्षेत्र में औसतन वर्षा 75 सेमी से 100 सेमी के बीच होती है। प्रदेश के उत्तरी-पूर्वी जिले इस क्षेत्र के अन्तर्गत आते हैं।
•मध्य उच्च पठार, बुन्देलखण्ड का पठार, रीवा-पन्ना पठार में औसत वर्षा होने का कारण वायुमण्डलीय आर्द्रता का कम होना एवं क्षेत्रीय स्थलाकृति का प्रभाव है।

(iv) निम्न वर्षा वाले क्षेत्र

• राज्य का पश्चिमी क्षेत्र निम्न वर्षा वाला क्षेत्र है। यहाँ औसत वर्षा 50 सेमी से 75 सेमी तक होती है। इस क्षेत्र में निम्न वर्षा होने का प्रमुख कारण मानसून का आर्द्रता से न्यून होना है। 
•दक्षिण-पूर्वी मानसून यहाँ तक पहुँचते-पहुँचते आर्द्रता रहित या न्यून आर्द्रता से युक्त रहा जाता है, इसलिए इस क्षेत्र में निम्न वर्षा होती है। राज्य के नीमच, मन्दसौर, रतलाम, धार, झाबुआ इत्यादि जिले इस क्षेत्र में आते हैं। गोहद (भिण्ड) में सबसे कम वर्षा होती है। मध्य प्रदेश राज्य की अधिकांश वर्षा दक्षिण-पश्चिमी मानसून से होती है।

3. शीत ऋतु

•मध्य प्रदेश में शीत ऋतु का काल नवम्बर से फरवरी माह तक का होता है।

•स्थानीय भाषा में शीत ऋतु को सियाला कहते हैं।

•23 सितम्बर से सूर्य के दक्षिणायन होने के साथ ही औसत तापमान कम होने लगता है। 21.1° से.ग्रे की समताप रेखा जनवरी माह में राज्य को उत्तरी एवं दक्षिणी दो भागों में विभाजित करती

•दिसम्बर-जनवरी माह में पश्चिमी विक्षोभ से राज्य के उत्तरी पश्चिमी भागों में हल्की वर्षा होती है, इसे मावठ कहते हैं। 

•मार्च तक आते-आते सूर्य की स्थिति बदलने से तापमान बढ़ने लगता है एवं ग्रीष्म ऋतु का आगमन होने लगता है।

•शीत ऋतु में रात्रि का तापमान गिरने से ऊँचे पठारी एवं पहाड़ी भागों में स्थानीय रूप से पाला (शीत की पराकाष्ठा) तथा कोहरा होता है। शिवपुरी, राज्य का सबसे ठण्डा क्षेत्र है। 

मध्य प्रदेश की ऋतु वेधशाला इन्दौर में स्थित है।

तापमान

मध्य प्रदेश में तापमान सूर्य की स्थिति की अपेक्षा समुद्र की निकटता तथा समुद्र तल की ऊँचाई से अधिक प्रभावित होता है। मध्य प्रदेश का औसत तापमान 21° से.ग्रे दर्ज किया गया है।
मध्य प्रदेश में मई महीने का सर्वाधिक तापमान खजुराहो में होता है।
इस राज्य का सर्वाधिक दैनिक तापान्तर मार्च माह में मापा जाता है। 


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