जबलपुर झण्डा सत्याग्रह (1923) क्या है? | jabalpur jhanda satyagrah kya hai?
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जबलपुर झण्डा सत्याग्रह (1923) क्या है? | jabalpur jhanda satyagrah kya hai?
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• जबलपुर झण्डा सत्याग्रह (1923)
1. जबलपुर में ही झण्डासत्याग्रह की नींव पड़ी थी। असहयोग आंदोलन की तैयारी के सिलसिले में पहुंचे अजमल खा और कांग्रेसियों के सम्मान के साथ जबलपुर नगरपालिका भवन पर तिरंगा फहराने की रणनीति कांग्रेस ने बनायी। पुलिस कमिश्रर ने गुस्साकर उस लिगे को उतरवाया और पैरो तले कुचला ।
2.इस अपमान के विरोध में तपस्वी प. सुंदरलाल, नाथुराम मोदी, सुभद्राकुमारी चौहान, लक्ष्मण सिंह चौहान, नरहरि अग्रवाल आदि ने जुलूस निकाला, जिन्हें पुलिस ने रोक दिया, लेकिन दूसरे जत्थे ने विक्टोरिया टाउनहाल पर झण्डा फहरा ही दिया।
3.यह कार्य दमोह निवासी श्री प्रेमचंद जैन उस्ताद ने किया था। उधर कांग्रेस ने इस सत्याग्रह के महत्व को समझकर अखिल भारतीय स्तर पर इसे मनाने हेतु नागपुर को चुना।
4.13 अप्रैल 1923 को नागपुर में शुरू इस सत्याग्रह के साथ जबलपुर में पुनः झण्डा सत्याग्रह का आयोजन हुआ
5.सत्याग्रह का नेतृत्व देवदास गाँधी, रामगोपालाचार्य तथा डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने किया। राष्ट्रीय ध्वज फहराने पर सुन्दरलाल को 6 माह की सजा दी गई सरोजनी नायडु, मौलाना आजाद की जबलपुर में उपस्थिति के मध्य कन्छोड़ीलाल, बंशीलाल और काशीप्रसाद ने टाउनहाल पर फिर तिरंगा लहरा दिया
6.18 अगस्त, 1923 को ब्रिटिशर्स ने राष्ट्रीय ध्वज के साथ स्वयंसेवकों को जुलूस की अनुमति दी जुलूस का नेतृत्व खनलाल चतुर्वेदी, वल्लभ भाई पटेल तथा राजेन्द्र प्रसाद ने किया।
7.नमक सत्याग्रह उधर गांधीजी दाण्डी में नमक बना रहे थे, इधर जबलपुर में 6 अप्रैल 1930 को सेठ गोविन्ददास औरप द्वारिका प्रसाद मिश्र ने नमक सत्याग्रह किया।
8.नमक सत्याग्रह में सिवनी जिले के दुर्गाशकर मेहता ने गाँधीचौक पर नमक बनाकर सत्याग्रह की शुरूआत की। यहाँ जेल में सुभाषचंद्र बोस, आचार्य विनोबा भावे, पंडित द्वारिकाप्रसाद मिश्र, शरद चंद्र बोस व एच.वी. कामथ बंद थे।
9.चरण पादुका नरसहार (14 जनवरी 1931) छतरपुर क्षेत्र में चरणपादुका ग्राम (उर्मिल नदी तट) में स्वतंत्रता सेनानियों की शांतिपूर्ण बैठक पर अंधाधुंध गोलियाँ कर्नल फिशर के आदेश से पुलिस ने चलायी, जिसमें छः सेनानी शहीद हो गये। यह मध्यप्रदेश का जलियांवाला बागकाण्ड कहलाता है।
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