एशियाटिक सोसायटी ऑफ बंगाल एवं उसके कार्य | Asiatic society of Bangal kya hai uske sansthapak ?

एशियाटिक सोसायटी ऑफ बंगाल एवं उसके कार्य | Asiatic society of Bangal kya hai uske sansthapak ?

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एशियाटिक सोसायटी ऑफ बंगाल :

• स्थापना 1784 ई.

• मुख्यालयः कलकत्ता (बंगाल) । 

• संस्थापकः विलियम जोंस

• इस संस्था द्वारा प्रकाशित एशियाटिक रिसर्चेज नामक पत्रिका में भारत के अतीत को प्रकाश में लाने का प्रथम वास्तविक प्रयास किया गया।

विलियम विल्किंसन की भगवद्गीता वह प्रथम अनूदित ग्रंथ है जिसका अनुवाद एशियाटिक सोसाटी ऑफ-बंगाल के अधीन मूल संस्कृत से अंग्रेजी भाषा में नवम्बर, 1784 ई. को तद्पश्चात 1787 ई. में विल्किस ने हितोपदेश का भी अनुवाद किया।

• 1789 ई. में जोंस ने कालिदास रचित अभिज्ञानशाकुंतलम् का अंग्रेजी अनुवाद किया।

• इसके पश्चात् 1792 ई. में जोंस ने गीतगोविंद का अंग्रेजी अनुवाद किया और उनकी मृत्यु के उपरांत 1792 ई. में इंस्टीट्यूट्स ऑफ हिंदू लॉ के नाम से मनुस्मृति का अनुवाद प्रकाशित हुआ। 

• वस्तुत: जोंस तथा विल्किंसन भारत विषयक ज्ञानशास्त्र के जन्मदाता थे। मनुस्मृति प्रथम ग्रंथ है जिसका अनुवाद 1776 ई. में सर्वप्रथम संस्कृत से अंग्रेजी भाषा में ए कोड ऑफ जेन्टूलॉज के नाम से हुआ था।

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