जगनिक कौन थे | jagnik kon the |

जगनिक कौन थे | jagnik kon the |


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हम इस post मेें आपके लिए लेकर आए हैं जगनिक कौन थे | jagnik kon the |


                   जगनिक


• लोक गाथाओं में निवास करने वाला ही लोक साहित्य है, जो चौपालों से लोकगीतों द्वारा एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में हस्तांतरित होता है। इसी साहित्य के प्रखर प्रेषक है- जगनिक । 

• आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने इनका जन्म संवत् 1230 में माना है। कलिंजर नरेश परमाल देव के दरबारी कवि जगनिक न सिर्फ कवि थे, बल्कि योद्धा भी थे।

 • रचनाएँ : 'परमाल रासो' (बुंदेली बोली में लिखित) और 'आल्हा खण्ड' |

: 'आल्हाखण्ड' विश्व की सबसे लंबी लोक गाथा है। इसमें बुंदेली की उपबोली बनाफरी का प्रयोग किया गया है। 

• आल्हाखण्ड का संबंध महोबा राजवंश से है। आल्हाखण्ड में जगनिक ने महोबा के दो प्रसिद्ध वीरों आल्हा और ऊदल के वीर चरित्र का वर्णन किया है। इसमें उनकी 52 लड़ाईयों का वर्णन ओजपूर्ण शैली में हुआ है। आल्हा प्रमुखतः वर्षा ऋतु में गाया जाता है।


आल्हाखण्ड की पाण्डुलिपि का संकलन 1865 में ब्रिटिश अधिकारी चार्ल्स इलियट ने 23 खण्डो में किया और इसे मुंशी रामस्वरूप ने प्रकाशित कराया। 

• बुंदेलखण्ड की प्रसिद्ध लोकगायिका संजो बघेल, आल्हा गायन के लिए देशभर में प्रसिद्ध है।


 
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