बारदोली अंदोलन क्या था व कब हुआ | bardoli andolan kya tha va kab hua tha |




 बारदोली अंदोलन 

गुजरात के सूरत में इस क्षेत्र में गांधी की लोकप्रियता असहयोग के समय से ही व्याप्त थी।

मेहता बंधुओं (उमर व कल्याण) ने यहाँ के किसानों का नेतृत्व किया।यहाँ के आदिवासियों को 'कालीपराज' कहा जाता था इन लोगों ने सरकार के विरुद्ध संघर्ष में भाग लिया। गांधी ने उन्हें 'रानी पराज' कहा।

1926 में वहाँ लगान दर में 30% वृद्धि करने की बात की गई तो विद्रोही स्वर फूटने लगे सरकार ने इसे घटाकर 22% कर दिया। 
अब स्थानीय किसानों व नेताओं ने खेड़ा, बरसाड़ व नागपुर झण्डा सत्याग्रह के नेतृत्वकर्ता वल्लभ भाई पटेल को आमन्त्रित किया।
पटेल ने यहाँ सत्याग्रह आरम्भ किया जिसमें उन्हें स्त्रियों का भी भरपूर सहयोग मिला बारदोली की स्त्रियों ने ही उन्हें सरदार की उपाधि दी।

1928 में गांधी भी वहाँ पहुँचे जिससे यदि पटेल को गिरफ्तार कर लिया जाए तो वह नेतृत्व अपने हाथ में ले लेंगे। अंततः सरकार को मैक्सवेल ब्रूम फील्ड आयोग का गठन करना पड़ा। इस आयोग की अनुसंशा पर वृद्धि 22% से घटाकर 6% कर दिया गया।

विशेष:-

सविनय अवज्ञा आन्दोलन जो कि समाजवादी मूल्यों से युक्त था। इससे किसानों की चेतना और बढ़ी और अब वे राष्ट्रीय चेतना के महत्त्वपूर्ण अंग हो गये। सहजानन्द सरस्वती का प्रयास उल्लेखनीय है। उन्होंने 1929 में 'बिहार किसान सभा' की स्थापना की।

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