वर्ष 1947 में भारत का विभाजन किन परिस्थितियों में हुआ?| 1947 main bharat ka vibhaajan kin paristhiyon mai hua?|

वर्ष 1947 में भारत का विभाजन किन परिस्थितियों में हुआ?| 1947 main bharat ka vibhaajan  kin paristhiyon mai hua?|


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उत्तर- अंग्रेजों द्वारा भारत में शासन करने के दौरान 'फूट डालो और शासन करो' की नीति पर 20वीं शताब्दी के प्रारंभ से ही बल दिया गया था। शुरूआती विद्रोहों के दौरान ही उन्हें यह समझ आ चुका था कि इतने बड़े देश में स्थानीय एकता का अभाव ही इनके शासन को मजबूत करता है। अपनी इसी नीति के फलस्वरूप बंगाल विभाजन के द्वारा सांप्रदायिकता को बढ़ावा दिया गया जिससे भारतीय राजनीति में सांप्रदायिक नेताओं ने भी प्रवेश कर लिया था। परिणामस्वरूप मुस्लिम लीग का गठन हुआ जिसने पृथक् निर्वाचन के माध्यम से विभाजन तक का सफर तय किया।


इस सांप्रदायिक समस्या को और आगे बढ़ाने का काम 'हिन्दू महासभा' जैसे संगठनों ने किया जिसका नारा था कि 'हिन्दुस्तान हिन्दुओं का है।' स्वतंत्रता प्राप्ति के संघर्ष के अंतिम दशक में जिन्ना द्वारा द्विराष्ट्र का सिद्धांत दिया गया, तत्पश्चात् मार्च, 1940 में पाकिस्तान प्रस्ताव पारित किया। वर्ष के 1946 चुनाव के दौरान पहली बार चुनावों में धर्म ने महत्वपूर्ण भूमिका अदा की। धार्मिक आधार पर पड़े वोट लीग के बँटवारे की माँग की तरफ बढ़ते कदम थे।


तत्कालीन परिस्थिति के रूप में जिन्ना द्वारा मनाए गए प्रत्यक्ष कार्यवाही दिवस (अगस्त, 1946) की घोषणा ने सांप्रदायिकता को उग्र किया, जो कि दंगों में बदल गए थे। अंततः सांप्रदायिक विभाजन ने अपना रूप राजनीतिक विभाजन के रूप में अगस्त, 1947 में रख लिया। निष्कर्षतः राष्ट्रीय आंदोलन में उपजी जटिलताएँ राजनीतिक दलों के हितों के संघर्ष का रूप ले चुकी थीं जिसका परिणाम पाकिस्तान एवं भारत का पृथक् राष्ट्र बन जाना था।



 
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