52वाँ संविधान संशोधन अधिनियम 1985 | 52th constitution amendament act 1985 |

52वाँ संविधान संशोधन अधिनियम 1985 



संविधान में दसवीं अनुसूची शामिल कर दल-बदल से संबंधित प्रावधान किये गए। इसके द्वारा निर्धारित किया गया कि कोई भी व्यक्ति उस स्थिति में संसद या राज्य विधानमण्डल का सदस्य नहीं रहेगा-

यदि वह स्वेच्छा से अपने दल की सदस्यता त्याग दे। निर्दलीय रूप से निर्वाचित सदस्य किसी राजनीतिक दल में शामिल हो जाए।

यदि वह सदन में अपने दल के निर्देश के विरूद्ध मतदान करता है या मतदान में भाग नहीं लेता (यदि इस संबंध में 15 दिनों के भीतर दल द्वारा माफी प्राप्त करता है तब ऐसा नहीं)राजनीतिक दल के कम से कम एक तिहाई सदस्य उससे अलग हो जाएँ तो उसे दल का विघटन माना जाएगा और ऐसी स्थिति में इन सदस्यों की सदस्यता समाप्त नहीं होगी।। 

किसी दल के दो तिहाई सदस्यों की सहमति से उसका विलय किसी अन्य राजनीतिक दल में हो जाए तो ऐसी स्थिति में भी सदस्यता समाप्त नहीं होगी। दल-बदल पर उठें किसी भी प्रश्न या विवाद पर अंतिम निर्णय सदन के अध्यक्ष या सभापति का होगा तथा वह निर्णय न्यायिक पुनर्विलोकन से परे होगा।




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