भू-राजस्व व्यवस्था क्या थी समझाइये | भू-राजस्व व्यवस्था| bhurajsav vyavastha |


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भू-राजस्व व्यवस्था



1765 तक उत्तरदायित्व व अधिकार कम होने से भू-राजस्व संबंधी परेशानियाँ कम रही किन्तु 1765-72 के दौर में द्वैध शासन के समय भ्रष्टाचार की स्थिति कायम हो गई क्योंकि दीवानी व निजामत के अधिकारों में अस्पष्टता बनी हुई थी। 

[1770 में t शिताब राय व मो. रजा खां पर नियन्त्रण रखने के लिए भू राजस्व नियन्त्रण परिषद् का गठन किया गया। 1772 में वारेन हेस्टिंग्स के कार्यकाल में सर्किट कमेटी का गठन किया गया जिसमें हेस्टिंग्स और उसकी कार्यकारिणी के चार सदस्य भी शामिल थे।

प्रत्येक जिले में पर्यवेक्षकों के आधार पर कलेक्टर नियुक्त किए गये।वारेन हेस्टिंग्स ने लगान अधिग्रहण को प्रभावी बनाने के लिए 1772 में पंचवर्षीय व्यवस्था लागू की जिसमें इजारेदारी (नीलामी) प्रथा को अपनाया गया।

1786 में प्रांतीय काउंसिल के स्थान पर 'राजस्व समिति' का गठन किया गया जिसका उद्देश्य राजस्व प्रशासन का केन्द्रीयकरण करना था कालान्तर में इस राजस्व समिति का नाम 'राजस्व बोर्ड' कर दिया गया। 

कार्नवालिस के समय राजस्व बोर्ड का अध्यक्ष सर जॉन शोर और रिकार्डकीपर चार्ल्स ग्रांट थे।


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