नील विद्रोह क्या था ?| नील विद्रोह पर टिप्पणी लिखिए | neel vidroh kya tha |



नील विद्रोह (1859-60)

इसका मुख्य कारण पूर्वी भारत में यूरोपीय नील बागान मालिकों द्वारा नील उत्पादन हेतु किसानों को विवश करना था।

1860 में नादिया जिले के गोविन्दपुर गांव से नील विद्रोह प्रारम्भ हुआ और शीघ्र ही इसने पूरे बंगाल को अपने आगोश में ले लिया। 

'हिन्दू पैट्रियाट' के संपादक हरिश्चन्द्र मुखर्जी ने विशिष्ट भूमिका निभाई।

इसका नेतृत्व दिगम्बर व विष्णु विश्वास ने किया।

दीन बंधु मित्र ने नील दर्पण, नामक नाटक की रचना कर कृषकों के उत्पीड़न को सजीव ढंग से चित्रित किया।
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