पत्थरों का स्वप्नलोक: हम्पी | hampi |

पत्थरों का स्वप्नलोक: हम्पी | hampi | 


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पत्थरों का स्वप्नलोक: हम्पी


हम्पी कर्नाटक की तुंगभद्रा नदी के किनारे स्थित एक प्राचीन गौरवशाली साम्राज्य विजयनगर का अवशेष है। प्राचीन स्मारकों का यह केंद्र उत्तरी कर्नाटक के बेल्लारी जिले मेंबेंगलुरू से 353किमी., बेल्लारी से 74 किमी. और हॉसपेट से 13 किमी.की दूरी पर स्थित अब एक गांव है। हम्पी को यूनेस्को ने भारत में स्थित विश्व विरासत का दर्जा 1986 ई. में दिया है। इस गांव में आज भी विजयनगर साम्राज्य के नई अवशेष है। इतिहास और पुरातत्व के दृष्टि से हम्पी एक अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है।


गौरवशाली इतिहास


• हम्पी को प्राचीन काल में कई नामों से जाना जाता था, जैसे-पम्पा क्षेत्र, भास्कर क्षेत्र, हम्पे, किष्किंधा क्षेत्र है। हम्पी नाम में कन्नड़ शब्द हम्पे से पड़ा है और हम्प शब्द तुंगभद्रा नदी के प्राचीन नाम पम्पा से आया था।


• हम्पी का इतिहास काफी प्राचीन है, लेकिन यहां विजयनगर साम्राज्य की स्थापना 1336 ई. में 02 भाइयों हरिहर राय और बुक्का राय ने की थी। यह काफी कम समय में ही बेहद संपन्न और धनी राज्य बन गया। 


• यह साम्राज्य कृष्णदेव राय के शासन में अपने चरम पर था। बुद्धिमान तेनालीराम इन्हीं के दरबार में थे। इस साम्राज्य का विस्तार मौजूदा कर्नाटक आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र के क्षेत्रों तक हो गया था। यह अपनी सम्पत्ति, कला, साहित्य, संस्कृति, व्यापार के लिए काफी ख्याति प्राप्त कर चुका था, लेकिन मुगलों के आक्रमण से विजयनगर साम्राज्य नष्ट हो गया और हम्पी भी खंडहर में परिवर्तित हो गया।


• बीजापुर, गोलकुंडा, अहमदनगर और बीदर के मुस्लिम राज्यों ने इस राज्य पर आक्रमण करने के लिए एक गठजोड़ बना लिया और 1565 ई. की लड़ाई में | विजयनगर साम्राज्य हार गया। उसके बाद मुगलों की सेनाओं ने इस शहर को बर्बाद कर दिया। हम्पी के एशिया में सबसे बड़ा खुले स्मारकों वाला गुम हुआ शहर मान जाता है। विजयवाड़ा राज्य की कतार में किलेबंदी की गई थी।


धार्मिक महत्व

हम्पी एक महत्वपूर्ण धार्मिक केंद्र भी रहा है। मिथकों के अनुसार रामायण कथा के द्वारा, भगवान राम और लक्ष्मण जब मां सीमा की तलाश में भटक रहे थे, तो वह किष्किंधा क्षेत्र में वहां के शासक वानर भाइयों वाली और सुग्रीव की खोज में पहुंचे थे। इस क्षेत्र का एक प्रख्यात धार्मिक आकर्षण विरूपाक्ष मंदिर भी है, जो | विजयनगर के देवता भगवान विरूपाक्ष को समर्पित है। हम्पी में प्रत्येक वर्ष नवंबर माह में वार्षिक समारोह मनाया जाता है, जिसे हम्पी उत्सव या विजय उत्सव कहते है।।



 
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