भारतीय संविधान के प्रमुख संशोधन | Bhartiya Samvidhan ke Pramukh Sansodhan | Important Constitutional Amendments

भारतीय संविधान के प्रमुख संशोधन | Bhartiya Samvidhan ke Pramukh Sansodhan | Important Constitutional Amendments

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भारतीय संविधान के प्रमुख संशोधन | Bhartiya Samvidhan ke Pramukh Sansodhan | Important Constitutional Amendments इस प्रकार हैं -

भारतीय संविधान में समय - समय पर अवश्यकता अनुसार संशोधन किए गए गए हैं 1951 ई. से अब तक संविधान में 105 संशोधन किए जा चुके हैं जिनमें से प्रमुख संविधन संशोधन निम्नलिखित हैं -

              संविधान में किये गये प्रमुख संशोधन

• प्रथम संशोधन (1951 ई.)→

इसके माध्यम से स्वतंत्रता, समानता एवं संपत्ति से संबंधित मौलिक अधिकारों को लागू किये जाने संबंधी कुछ व्यावहारिक कठिनाइयों को दूर करने का प्रयास किया गया। भाषण एवं अभिव्यक्ति के मूल अधिकारों पर इसमें उचित प्रतिबंध की व्यवस्था की गई। साथ ही, इस संशोधन द्वारा संविधान में नौवीं अनुसूची को जोड़ा गया, जिसमें उल्लिखित कानूनों को सर्वोच्च न्यायालय के न्यायिक पुनर्विलोकन की शक्तियों के अंतर्गत परीक्षा नहीं की जा सकती है।

• 7 वाँ संशोधन (1956 ई.) →

इस संशोधन द्वारा भाषायी आधार पर राज्यों का पुनर्गठन किया गया, जिसमें पहले के तीन श्रेणियों में राज्यों के वर्गीकरण को समाप्त करते हुए राज्यों एवं केन्द्रशासित प्रदेशों में उन्हें विभाजित किया गया। साथ ही, इनके अनुरूप केन्द्र एवं राज्य की विधान पालिकाओं में सीटों को पुनर्व्यवस्थित किया गया।

● 10 वाँ संशोधन (1961 ई.) →

इसके अंतर्गत भूतपूर्व पुर्तगाली अंतःक्षेत्रों-दादर एवं नगर हवेली को भारत में शामिल कर उन्हें केंद्रशासित प्रदेश का दर्जा दे दिया गया।

• 12 वाँ संशोधन (1962 ई.)→

इसके अंतर्गत संविधान की प्रथम अनुसूची में संशोधन कर गोवा, दमन एवं दीव को भारत में केंद्रशासित प्रदेश के रूप में शामिल कर लिया गया।

• 14 वाँ संशोधन (1963ई.)→

इसके द्वारा केंद्रशासित प्रदेश के रूप में पुदुचेरी को भारत में शामिल किया गया। साथ ही, इसके द्वारा हिमाचल प्रदेश, मणिपुर, त्रिपुरा, गोवा, दमन और दीव तथा पुदुचेरी केंद्रशासित प्रदेशों में विधानपालिका एवं मंत्रिपरिषद् की स्थापना की गई।

• 18 वाँ संशोधन (1966 ई.) →

इसके अंतर्गत पंजाब का भाषायी आधार पर पुनर्गठन करते हुए पंजाबी भाषी क्षेत्र को पंजाब एवं हिन्दी भाषी र्न क्षेत्र को हरियाणा के रूप में गठित किया गया। पर्वतीय क्षेत्र हिमाचल प्रदेश को दे दिये गये तथा चंडीगढ़ को केन्द्रशासित प्रदेश बनाया गया।

• 21 वाँ संशोधन (1967 ई.) →

इसके द्वारा सिंधी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची के अंतर्गत पंद्रहवीं भाषा के रूप में शामिल किया गया।

• 24वॉ संशोधन (1971 ई.)→

इस संशोधन के अंतर्गत संसद की इस शक्ति को स्पष्ट किया गया कि वह संविधान के किसी भी भाग को, जिसमें भाग तीन के अंतर्गत आने वाले मूल अधिकार भी हैं, संशोधित कर सकती है। साथ ही, यह भी निर्धारित किया गया कि संशोधन संबंधी विधेयक जब दोनों सदनों से पारित होकर राष्ट्रपति के समक्ष जायेगा तो इस पर राष्ट्रपति द्वारा सम्मति दिया जाना बाध्यकारी होगा।

• 35वाँ संशोधन (1974 ई.) →इसके अंतर्गत सिक्किम का संरक्षित रोज्यों का दर्जा समाप्त कर उसे सम्बद्ध राज्य के रूप में भारत में प्रवेश दिया गया।

• 36वाँ संशोधन (1975 ई.) → इसके अंतर्गत सिक्किम को भारत का बाईसवाँ राज्य बनाया गया।

• 42 वाँ संशोधन (1976 ई.)→ इसके द्वारा संविधान में व्यापक परिवर्तन लाये गये, जिनमें से मुख्य निम्नलिखित थे—

(क) संविधान की प्रस्तावना में समाजवादी', 'धर्मनिरपेक्ष' एवं 'एकता और अखण्डता आदि शब्द जोड़े गये।

(ख) सभी नीति-निर्देशक सिद्धान्तों को मूल अधिकारों पर सर्वोच्चता सुनिश्चित की गई।

(ग) इसके अंतर्गत संविधान में दस मौलिक कर्त्तव्यों को अनुच्छेद-51 (क), (भाग-iv क) के अंतर्गत जोड़ा गया।

(घ) इसके द्वारा संविधान को न्यायिक परीक्षण से मुक्त किया गया।

(ङ) सभी विधानसभाओं एवं लोकसभा की सीटों की संख्या को इस ब्दी के अंत तक के लिए स्थिर कर दिया गया।

(च) लोकसभा एवं विधानसभाओं की अवधि को पाँच से छह वर्ष कर दिया गया।

(छ) इसके द्वारा यह निर्धारित किया गया कि किसी केन्द्रीय कानून की वैधता पर सर्वोच्च न्यायालय एवं राज्य के कानून की वैधता का उच्च न्यायालय ही परीक्षण करेगा। साथ ही, यह भी निर्धारित किया गया कि किसी संवैधानिक वैधता के प्रश्न पर पाँच से अधिक न्यायाधीशों की बेंच द्वारा दो-तिहाई बहुमत से निर्णय दिया जाना चाहिए और यदि न्यायाधीशों की संख्या पाँच तक हो तो निर्णय सर्वसम्मति से होना चाहिए।

(ज) इसके द्वारा वन-संपदा, शिक्षा, जनसंख्या नियंत्रण आदि विषयों को राज्य-सूची से समवर्ती सूची के अंतर्गत कर दिया गया।

(झ) इसके अंतर्गत निर्धारित किया गया कि राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद् एवं उसके प्रमुख प्रधानमंत्री की सलाह के अनुसार कार्य करेगा।

(ट) इसने संसद को राष्ट्रविरोधी गतिविधियों से निपटने के लिए कानून बनाने के अधिकार दिये एवं सर्वोच्चता स्थापित की ।

• 44 वाँ संशोधन (1978 ई.)→

इसके अंतर्गत राष्ट्रीय आपात स्थिति लागू करने के लिए आंतरिक अशांति के स्थान पर 'सैन्य विद्रोह' का आधार रखा गया एवं आपात स्थिति संबंधी अन्य प्रावधानों में परिवर्तन लाया गया, जिससे उनका दुरुपयोग न हो।

इसके द्वारा संपत्ति के अधिकार को मौलिक अधिकारों के भाग से हटा कर विधिक (कानूनी) अधिकारों की श्रेणी में रख दिया गया।

लोकसभा तथा राज्य विधानसभाओं की अवधि 6 वर्ष से घटाकर पुनः 5 वर्ष कर दी गई।

उच्चतम न्यायालय को राष्ट्रपति तथा उपराष्ट्रपति के निर्वाचन संबंधी विवाद को हल करने की अधिकारिता प्रदान की गई।

• 52 वाँ संशोधन (1985 ई.) →

इस संशोधन के द्वारा राजनीतिक दल-बदल पर अंकुश लगाने का लक्ष्य रखा गया।
इसके अंतर्गत संसद या विधान मंडलों के उन सदस्यों को अयोग्य घोषित कर दिया जायेगा, जो उस दल को छोड़ते हैं जिसके चुनाव चिह्न पर उन्होंने चुनाव लड़ा था, पर यदि किसी दल की संसदीय पार्टी के एक-तिहाई सदस्य अलग दल बनाना चाहते हैं तो उन पर अयोग्यता लागू नहीं होगी।
दल-बदल विरोधी इन प्रावधानों को संविधान की दसवीं अनुसूची के अंतर्गत रखा गया।

• 56 वाँ संशोधन (1987 ई.)→ इसके अंतर्गत गोवा को एक राज्य का दर्जा दिया गया तथा दमन और दीव को केन्द्रशासित प्रदेश के रूप में ही रहने दिया गया।

• 61 वाँ संशोधन (1989 ई.) →

इसके द्वारा मतदान के लिए आयु सीमा 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष लाने का प्रस्ताव था।

• 69 वाँ संशोधन (1991 ई.) →

दिल्ली को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र(NCR) बनाया गया तथा दिल्ली संघ राज्य क्षेत्र के लिए विधानसभा और मंत्रिपरिषद् का उपबंध किया गया। 

• 71 वाँ संशोधन (1992 ई.) →

आठवीं अनुसूची में कोंकणी,मणिपुरी और नेपाली भाषा को सम्मिलित किया गया।

• 73 वाँ संशोधन (1992-93 ई.) →

इसके अंतर्गत संविधान में ग्यारहवीं अनुसूची जोड़ी गयी। इसके पंचायती राज संबंधी प्रावधानों को सम्मिलित किया गया है। इस संशोधन के द्वारा संविधान में भाग-9 जोड़ा गया। इसमें अनु.-243 और अनु.-243 A/क से 243 N/ण तक अनुच्छेद है।

• 74 वाँ संशोधन (1993-93 ई.)→

इसके अंतर्गत संविधान में बारहवीं अनुसूची शामिल की गयी, जिसमें नगरपालिका, नगर निगम और नगर परिषदों से संबंधित प्रावधान किये गये हैं। इस संशोधन के द्वारा संविधान में भाग-9 क जोड़ा गया। इसमें अनुच्छेद-243 P से अनुच्छेद-243 ZF/यद तक के अनुच्छेद हैं।

• 86 वाँ संशोधन (2002 ई.) →

इस संशोधन अधिनियम द्वारा देश के 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों के लिए अनिवार्य एवं निःशुल्क शिक्षा को मौलिक अधिकार के रूप में मान्यता देने संबंधी प्रावधान किया गया है, इसे
अनुच्छेद-21 (क) के अन्तर्गत संविधान में जोड़ा गया है। इस अधिनियम द्वारा संविधान के अनुच्छेद-45 तथा अनुच्छेद-51 (क) में संशोधन किये जाने का प्रावधान है।

• 91वाँ संशोधन (2003 ई.) →

दल-बदल व्यवस्था में संशोधन, केवल सम्पूर्ण दल के विलय को मान्यता, केन्द्र तथा राज्य में मंत्रिपरिषद् के सदस्य संख्या क्रमशः लोकसभा तथा विधानसभा की सदस्य संख्या का 15% होगा (जहाँ सदन की सदस्य संख्या 40-40 है, वहाँ अधिकतम 12 होगी)।

• 92 वाँ संशोधन (2003 ई.)→

संविधान की आठवीं अनुसूची में बोडो, डोगरी, मैथिली और संथाली भाषाओं का समावेश । •

• 97वाँ संविधान संशोधन (2011 ई.)→

इस संशोधन के द्वारा सहकारी समितियों को एक संवैधानिक स्थान एवं संरक्षण प्रदान किया गया। संशोधन द्वारा संविधान में निम्नलिखित तीन बदलाव किए गए

1. सहकारी समिति बनाने का अधिकार एक मौलिक अधिकार बन गया। [अनुच्छेद-19 (1)ग]

2. राज्य की नीति में सहकारी समितियों को बढ़ावा देने का एक नया नीति निदेशक सिद्धांत का समावेश (अनुच्छेद-43 ख)

3. 'सहकारी समितियाँ' नाम से एक नया भाग- IX - ख संविधान में जोड़ा गया। [अनुच्छेद 243 यज से 243 यन]

• 99वाँ संविधान संशोधन (2014 ई.)→

राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (NJAC) की स्थापना 

• 100वाँ संविधान संशोधन (2015 ई.) →

भारत-बांग्लादेश भूमि हस्तांतरण ।

• 101वाँ संविधान संशोधन (2016 ई.) →

इसके द्वारा वस्तु एवं सेवाकर (GST) को लागू किया गया। 1 July 2017

• 102 वाँ संविधान संशोधन (2018 ई.) →

इस अधिनियम द्वारा संविधान में अनुच्छेद 338 (ख) को जोड़ते हुए 'राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग' (OBC) के गठन का प्रावधान किया गया है। संघ एवं राज्य सरकार सामाजिक एवं शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्ग को प्रभावित करने वाले सभी नीतिगत मामलों में आयोग से परामर्श करेगी।

• 103 वाँ संविधान संशोधन (2019 ई.) →

इस संशोधन के माध्यम से संविधान में दो नए अनुच्छेद 15 (6) एवं 16 (6) को जोड़ा गया है। इस संविधान संशोधन से पूर्व में आरक्षण, सामाजिक व शैक्षिक पिछड़ापन को आधार मानते हुए जातिगत आधार पर ही दिया जाता रहा है, किंतु इस संशोधन के द्वारा 'आर्थिक वंचना' को भी पिछड़ेपन का आधार स्वीकार करते हुए 10% आरक्षण की व्यवस्था की गयी है। ( EWS के लिए आरक्षण का प्रावधान )

• 104वाँ संविधान संशोधन (2019 ई.) →

इस संशोधन द्वारा संविधान के अनुच्छेद 334 (क) में संशोधन करते हुए लोक सभा एवं राज्यों की विधान सभाओं में अनुसूचित जातियों एवं अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षण संबंधी प्रावधान को पुनः अगले 10 वर्षों के लिए बढ़ाते हुए इसे 25 जनवरी, 2030 तक के लिए प्रभावी बना दिया गया है।

• 105 वाँ संविधान संशोधन (18 Aug,2021)

हाल ही में, संसद से पारित 127वें संविधान संशोधन विधेयक को राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के पश्चात् 105 वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2021 के रूप में अधिसूचित किया गया।

संशोधन के अनुसार राष्ट्रपति केवल केंद्र सरकार के उद्देश्यों के लिए सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों की सूची को अधिसूचित कर सकते हैं। यह केंद्रीय सूची केंद्र सरकार द्वारा तैयार और अनुरक्षित की जाएगी।
 

यह अधिनियम उच्चतम न्यायालय के उस फैसले के प्रभाव को कम करने के लिये आवश्यक हो गया था, जिसमें राज्यों ने ‘102वें संविधान संशोधन’ के अधिनियमित किये जाने के बाद 'पिछड़े वर्गों' की सूची में समुदायों को शामिल करने या बाहर करने की अपनी शक्ति खो दी थी।

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